Skip to main content

इश्क़ करना चाहते हो तो

इश्क़ तुमसे जो मांगे दे देना 

अगर इश्क़ करना चाहते हो तो 

इश्क़ पकाने में लगती है मेहनत 

पसीना कर देता है तुम्हें तरबतर 

जलते रहना इश्क करने की शर्त  होती है 

तो जलते रहना अगर इश्क़ करना चाहते हो तो 

जुनून की हद को पार करके इश्क़ करना 

बार-बार मर जाना होता है इश्क़ करना 

तो मरते रहना इश्क़ करना चाहते हो तो 

इश्क़ में तुम तुम नहीं रह जाते 

इश्क़ में  बस बचता है खुदा 

तुम खुदा हो जाना 

तुम इश्क़ हो जाना 

कतरा-कतरा खून का इश्क़ में तब्दील कर देना 

अगर इश्क़ करना चाहते हो तो 

लड़ जाना, मर जाना खुद को खत्म करने के लिए 

अगर इश्क़ करना चाहते हो तो 

फिर जब आखरी सांस भी उड़ जाएगी कहीं हवा में 

और सदियों से जलती चिता जब ठंडी हो जाएगी 

उस राख में महकोगे तुम 

तुम खुदा बन जाओगे, तुम इश्क़ बन जाओगे 

फिर वो राख बड़े गुमान से हवा के हर कतरे में उड़ेगी और कहेगी 

इश्क़ किया था मैंने

हाँ इश्क़ किया था मैंने । 

                                                                               -रेणु कुंडु 

                                                                         RENU KUNDU

                                                                       

Comments

Popular posts from this blog

वे भ्रम में थे

आज तक जितनी जंग हुई हैं वे कभी नहीं लड़ी गई दूसरों से चाहे किस्सा विश्वयुद्ध का हो  या हो महाभारत से  जो भी लड़ा वह भ्रम में था कि  हासिल कुछ भौतिक होगा दुनिया देखेगी जब वह  धन, यश, प्रतिष्ठा से शोभित होगा  उसके आदेश माने जाएंगे  वह सर्वशक्तिशाली होगा  भ्रम में थे सब  भ्रम में थे और लड़ रहे थे  लड़ रहे थे केवल अपना विश्वास सत्यापित करने को  अपना मूल्य स्थापित करने को  वे लड़ रहे थे अपने विश्वास पर विश्वास करने को  वे लड़ रहे थे केवल खुद से जितने के लिए  उन्होंने कभी कुछ भौतिक हासिल किया ही नहीं .....                                                                                              -रेणु कुंडु                           ...

मेरे पिता

मेरे पिता अक्सर रातों को जागा करते थे वे कुछ देर चहलकदमी करते, एक सिगरेट पीते  कुछ देर बैठते और फिर इसी क्रम को दोहराते  इस क्रम में वे लगातार कुछ सोचते रहते  आज मैं पूरी रात जागी हूं  मैंने पूरी रात कुछ सोचा है  मैं अक्सर रातों को जागना नहीं चाहती  शायद वे भी नहीं चाहते होंगे  उनके माथे की लकीरें, चेहरे की बनावट  कुछ बनती बिगड़ती रहती वे शायद कुछ सिगरेट के धुएं में उड़ाना चाहते थे पर शायद कुछ उनके हाथ नहीं था  आज मेरे भी कुछ हाथ नहीं है  मैं भी पूरी रात सोई नहीं हूं                                                                                      -रेणु कुंडु                                                ...