वे कभी नहीं लड़ी गई दूसरों से
चाहे किस्सा विश्वयुद्ध का हो
या हो महाभारत से
जो भी लड़ा वह भ्रम में था कि
हासिल कुछ भौतिक होगा
दुनिया देखेगी जब वह
धन, यश, प्रतिष्ठा से शोभित होगा
उसके आदेश माने जाएंगे
वह सर्वशक्तिशाली होगा
भ्रम में थे सब
भ्रम में थे और लड़ रहे थे
लड़ रहे थे केवल अपना विश्वास सत्यापित करने को
अपना मूल्य स्थापित करने को
वे लड़ रहे थे अपने विश्वास पर विश्वास करने को
वे लड़ रहे थे केवल खुद से जितने के लिए
उन्होंने कभी कुछ भौतिक हासिल किया ही नहीं .....
-रेणु कुंडु
RENU KUNDU
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